Geeton Ki Phulwari By Vijaydan Dedha

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  • Author Name : Vijaydan Dedha
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  • About book - लोकगीतों और समाज का ठीक वही संबंध है, जो धरती और पौधों का होता है धरती की विशाल गोद में जिस प्रकार पौधे अपने छोटे-से अवयव को लेकर सुरक्षित एवं सुंदर अनुभव करते हैं-लोक-गीत भी ठीक उसी प्रकार विस्तृत लोक-जीवन की अनेकानेक वस्तुरिथितियों के बीच अपने को सुरक्षित एवं सुंदर अनुभव करते हैं । जैसी धरती, वैसा ही पौधा। जैसी ऋतु, वैसी ही पौधे की गरिमा। जैसी पौधे की प्रकृति, ठीक उसी के अनुकूल उसका पुष्पित सौंदर्य। इधर जैसा समाज, ठीक उसी के अनुकूल गीतों का उद्भव। समाज में रागात्मक संबंधों का जितना वैभव, ठीक उतनी ही सुंदर अभिव्यक्तियां। सभी प्रकार के लोक-गीत अपने स्वरूप को सामाजिक धरोहर से ही प्राप्त करते हैं। भौगोलिक दृष्टि से राजस्थान भले ही अपने मरुस्थल के लिए प्रसिद्ध हो, किंतु लोक-गीतों के संदर्भ में वह एक उर्वरप्रदेश है, जिसका प्रमाण है यह पुस्तक गीतों की फुलवाड़ी। इसमें संकलित 118 लोक-गीतों को तीन खंडों में विभाजित किया गया है-1. प्रेम के गीत, 2. पीहर व ससुराल के गीत तथा 3. भाई-बहिन के गीत । सभी गीतों के सरल, सहज और मूलनिष्ठ हिंदी अनुवाद भी कैलाश कबीर द्वारा साथ-साथ प्रस्तुत किए गए हैं परिशिष्ट में लोक भाषा की विशिष्ट स्थानिक शब्दावली को सुस्पष्ट रूप से व्याख्यायित भी किया गया है पुस्तक में शामिल 'महिला लोक गीतों की सृजन प्रक्रिया और पृष्ठभूमि तथा 'लोक गीतों की भावभूमि पर लिखित कोमल कोठारी के आलेख जहाँ संकलित लोक गीतों को समझने की नई दृष्टि देते हैं, वहीं संपूर्ण भारतीय लोक साहित्य के अध्ययन के संदर्भ में भी अनेक प्रस्थान बिंदु उद्घाटित करते हैं । अब जबकि लोक-संगीत की सहायता लेकर कला-संगीत के क्षेत्र ने अद्भुत क्रांति उत्पन्न कर दी है और सामाजिक आवश्यकता के रूप में लोक-संगीत को प्रभविष्णु एवं प्रभावी रूप से काम में लेने की प्रवृत्ति बढ़ रही है-इस पुस्तक की प्रस्तुति से निश्चिय ही कला-साहित्य के फलक में से कुछ नए आयाम जुड़ेंगे।
  • About author - विजयदान देथा (1926-2013) राजस्थानी और हिंदी के प्रतिष्ठित लेखक थे। उनकी लगभग तीन दर्जन प्रकाशित कृतियाँ हैं। राजस्थानी में बाता री फुलवाड़ी (चौदह खंडों में लोक साहित्य), उलझन, अलेखूं हिटलर (कहानी-संग्रह) तथा हिंदी में उषा ( कविता-संग्रह ) बापू के तीन हत्यारे, अतिरिक्त (आलोचना); साहित्य और समाज, मेरो दरद न जाने कोय (निबंध-संग्रह); अंतराल, सपनप्रिया (कहानी-संग्रह) तथा राजस्थानी कृतियों के हिंदी अनुवादों सहित राजस्थानी-हिंदी कहावत कोश प्रमुख हैं। अनोखा पेड़, कबू रानी उनके बाल कहानी संग्रह हैं। वे प्रेरणा, वाणी और लोक-संस्कृति नामक पत्रिकाओं के संपादन से भी संबद्ध रहे तथा समकालीन भारतीय साहित्य के अंक 45 और 46 का अतिथि संपादन भी किया। लोक सांस्कृतिक केंद्र 'रूपायन' के संस्थापक सचिव के साथ-साथ वे विभिन्न साहित्यिक सांस्कृतिक संस्थाओं से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे। उन्हें राजस्थानी भाषा की श्रेष्ठ कृति के लेखक के नाते 1974 में साहित्य अकादेमी पुरस्कार, भारतीय भाषा परिषद् पुरस्कार (1992) और मरुधारा पुरस्कार (1995) सहित अनेक पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
  • Translation - 
  • कैलाश कबीर (1955) कवि और अनुवादक हैं। आपकी प्रकाशित कृतियों में तुम्हारे आने पर (कविता-संग्रह) के अलावा विजयदान देथा और चंद्रप्रकाश देवल की अनेक राजस्थानी कृतियों के हिंदी अनुवाद तथा सर्वेश्वर दयाल सक्सेना सहित अनेक हिंदी लेखकों की कृतियों के राजस्थानी अनुवाद शामिल हैं।
  • About Author - Vijaydan Dedha
  • Book format - Hardcover 
  • Product details
  • Language ‏ : ‎ Hindi
  • Author : vijaydan detha
  • Publisher : Sahitya Akademi
  • Paperback ‏ : ‎ 472 pages
  • ISBN : 978-81-260-1822-2
  • Item Weight ‏ : ‎ 700 g

 

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