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About Book :रवीन्द्र-शताब्दी समारोह के अवसर पर साहित्य अकादेमी ने रवीन्द्रनाथ ठाकुर की चुनी हुई रचनाओं का हिन्दी अनुवाद प्रकाशित करने का आयोजन किया था इस माला में निम्नांकित ग्रन्थ प्रकाशित हो चुके हैं एक सौ एक कविताएँ रवीन्द्रनाथ की 21 कहानियों, रवीन्द्रनाथ के नाटक (विसार्जन, चित्रांगदा, चिरकुमार सभा, राजा, डाकघर मुक्तधारा तथा रक्त करबी) गोरा (उपन्यास), आँख की किरकिरी (उपन्यास), योगायोग (उपन्यास), रवीन्द्रनाथ के निबंध तीन भागों में (प्रथम भाग में दार्शनिक, धार्मिक, सामाजिक, राजनैतिक, सामयिक विषयों पर निबंध है, द्वितीय भाग में साहित्यिक विषयों पर निबंध, संस्मरण, यात्रा-विवरण और पत्रादि है और तृतीय भाग में साहित्य की व्यापकता और गहनता का विश्वसनीय प्रमाण मिल सकेगा), ताश का देश, रवीन्द्र रचना संचयन, रवीन्द्रनाथ का बाल साहित्य। गुरुदेव की रचनाओं के प्रामाणिक अनुवाद के इस महत् कार्य में अकादेमी को हिन्दी के लब्ध प्रतिष्ठ साहित्यकारों का सहयोग मिला है। आशा है कि अकादेमी का यह प्रयास हिन्दी के पाठकों को गुरुदेव की रचनाओं का रसास्वादन कराने में सहायक होगा ।
Book Editor : प्रस्तुत ग्रंथ की संपादिका लीला मजुमदार (1908-2007 ) बाङ्ला भाषा की प्रतिष्ठित लेखिका थी। प्रारंभिक शिक्षा शिलांग से प्राप्त कर वह सन् 1924 में अपने माता-पिता के साथ कोलकाता आ गई, जहाँ से उन्होंने स्नातक तथा स्नातकोत्तर की उपाधियाँ प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। डार्जिलिंग में अध्यापन कार्य से अपने कैरियर की शुरुआत कर बाद में उन्हें रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा शांतिनिकेतन में स्थित शैक्षिक संस्थान में अध्यापन के लिए आमंत्रित किया गया बाल्यावस्था में ही उनकी कहानी संग्रह संदेश नामक पत्रिका में प्रकाशित हो चुकी थी बैद्यनाथ बोरी, दीन दुपुर उनके प्रसिद्ध बाल प्रकाशनों में से है। संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कार (1963), रवीन्द्र पुरस्कार (1968) सहित उन्हें अनेक सम्मान, पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
Translation: प्रस्तुत ग्रन्थ में रवीन्द्रनाथ की बालापयोगी रचनाओं का हिन्दी अनुवाद बाङ्ला-ओड़िया साहित्य के समर्थ अनुवादक युगजीत नवलपुरी ने किया है, जिसके पाठ में हमें मूल का-सा आस्वाद मिलता है। जो पाठक इन रचनाओं को मूल रूप में पढना चाहते हैं, उनकी सुविधा के लिए इसका देवनागरी लिप्यन्तर भी प्रकाशित किया जा चुका है।
Book Format : Paper Back
ISBN :978-81-260-0009-8
