Sona Ki Aankhey

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MRP.60 Rs. 30
  • Availability : In Stock
  • Author Name : Usha Yadav
  • Available to : Purchase / Borrow
  • Book condition : Good condition preloved book

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About Book - आज सोना हिरनी भी मर गयी। इस महीने राजकीय उद्यान में यह तीसरे हिरन की मीत वी।मनोज को सोना से खास लगाव था। कितनी भोली, कितनी सीधी, कितनी प्यारी थी वह। मनोज अपने हाथों से नरम घास खिलाता तो वह लाड़ से उसकी गोद में मुंह रगड़ने लगती थी। कहीं भी हो, एक आवाज सुनते ही दौड़ी चली आती थी। अपनी बड़ी-बड़ी आंखों से टुकुर-टुकुर ताकने लगती थी। आज सुबह बेचारी कांटों की बाड़ के पास मरी पाई गयी। मनोज ने ही स्कूल जाते समय उसे सबसे पहले देखा और भागकर घबराई आवाज में बापू को खबर दी थी, "बापू-बापू, सोना उधर बाड़ के पास पड़ी है। हिलडुल नहीं रही। उसे कुछ हो तो नहीं गया है?""नहीं रे, कुछ नहीं हुआ है।" उसके बापू सेवाराम ने अपनी खरखराती आवाज में उसे घुड़क दिया था, "तू पढ़ने जा मैं अभी जाकर उसे देखता हूँ।" अपनी जगह से हिले बिना मनोज गिड़गिड़ा उठा था, सोना को मरने मत देना। डाक्टर से उसका इलाज कराना। "बापू "हां, हां, तू स्कूल जायेगा या यहीं सारी रामायण सुनाता रहेगा" बापू खीझ उठे तो भारी कदमों से, अपनी भीगी आंखें पोठता हुआ मनोज स्कूल की तरफ चल दिया था।पर दोपहर में छुट्टी के बाद घर आते ही छोटी वहन राधा ने फौरन सूचना दी, "भैया, सोना मर गयी " (from this book )

Product details

  • Language ‏ : ‎ Hindi
  • Author : Usha Yadav
  • Publisher : National Book Trust
  • Paperback ‏ : ‎ 59 pages
  • ISBN : 812373843-9

 

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