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About Book:आयुर्वेद नाम से लंबे बाले वाले ऐसे मनीषियों के बिंब उभरकर सामने आते हैं जो जड़ी-बूटी वाली 'सर्वरोगहर' औषधियां वितरित करते हैं । रहस्यों से घिरे इस चिकित्साविज्ञान ने विभिन्न प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है-रोमानी पुनर्जागरणवाद से लेकर पश्चिमोन्मुखी अस्वीकार तक तथा पूर्ण स्वीकृति से लेकर समग्र खंडन तक। आखिर यह चिकित्साविज्ञान है क्या? यह पुस्तक, ‘दोष-धातु-मल' की अवधारणा के उन रहस्यों से पर्दा हटाती है जो आयुर्वेद का आधार है। मूलभूत सिद्धातों की इस ढंग से व्याख्या की गयी है कि लगभग चमत्कारिक ढंग से दोष' शरीर की शासन परिषद् के रूप में सामने आते हैं तो धातु' (ऊतक) शासित रूप में और 'मल' उनके उत्पादों के रूप में हैं। पुस्तक में सरल जड़ी-बूटीय उपचार भी सुझाए गये हैं जिन्हें बाल्यावस्था, प्रौढ़ावस्था और वृद्धावस्था के दौरान रोगों का उपचार करने के लिए घरों में रखा जा सकता है।
About authors - शरदिनी डहाणूकर (डॉ.) सेठ जी.एस. मेडिकल कालेज एवं के.ई. एम. अस्पताल, मुंबई में भेषजविज्ञान की प्रोफेसर हैं। उन्होंने आयुर्वेद में विशद् अनुसंधान किया है। मराठी में लिखी उनकी एक पुस्तक 'फुलवा' महाराष्ट्र सरकार द्वारा पुरस्कृत है।
उर्मिला थत्ते (डॉ.) सेठ जी.एस. मेडिकल कालेज एवं के.ई.एम. अस्पताल, मुंबई में भेषजविज्ञान की एसोसिएट प्रोफेसर हैं। वह नैदानिक भेषजविज्ञान एवं आयुर्वेद की उत्साही छात्रा रही हैं। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में उनके बहुत से लेख प्रकाशित हो चुके हैं।
लक्ष्मीनारायण गर्ग (डॉ.) तकनीकी पुस्तकों के अनुवादक के रूप में एक परिचित नाम है।
Product details
- Language : hindi
- Author Name : Sharadini Dahanukar & Urmila Thatte
- Publisher : national book trust
- Paperback : 130 pages
- ISBN : 812372852-2
