Why Borrow ? : Avoid repeated cost on books buying or renting .You can take more risks in reading because you don’t have to commit to buying everything you read.If you don’t like a book, just take it back. Borrow Now
About book : प्राणियों में मनुष्य ही ऐसा प्राणी हैं, जो बातचीत द्वारा अपने विचारों और अपने सुख- की बातों को व्यक्त करने तथा दूसरों के विचारों और युख-दु सा की बातों को समझने की क्षमता रखता है । मनुष्य ने बातचीत के अपने इस विशेष गुण को आदिकाल से आज तक किए गए प्रयोगों एवं अभ्यासों द्वारा विकसित किया और सेंवारा है।
बातचीत विचारों के आदान-प्रदान का सबसे सरल माध्यम है, जिससे हम किसी पर भी अपनी छाप छोड़ सकते है अपने व दूसरों के अनेक अव्यक्त गुणों को उभारकर सामने ला सकते हैं और दूसरों के गुणों को ग्रहण कर लाभान्वित हो सकते है । बातचीत एक कला ही नहीं वरन् एक विज्ञान भी है और उसी तरह इसके क्रमानुगत निश्चित नियमभीर विज्ञान के रूप में प्रयोग द्वारा हम इसका विकास करते हैं और कला के रूप में हम इसके निरंतर अभ्यास से इसमें दक्षता प्राप्त करते हैं ।
बातचीत की कला में प्रवीण लोग निश्चय ही जीवन का सबसे अधिक आनंद ले सकते हैं। बोल-व्यवहार की कला का शिक्षण तथा निरंतर अभ्यास मनुष्य जीवन को सुखी, सुखद और सार्थक बनाने का सबसे महत्त्वपूर्ण साधन है। यह दुर्भाग्य की बात है कि हमारे देश में प्रायः इस कला के शिक्षण और साधना की उपेक्षा की जाती है इसीलिए हमारे घरों और समाज में होनेवाले तरह-तरह के अनावश्यक विवाद और विग्रह के कारण सुख-शांति की कमी पाई जाती है इसी कमी को पूरा करने के लिए प्रस्तुत है पुस्तक-बातचीत की कला। निश्चित ही यह पुस्तक युवा पीढ़ी को इस कला का व्यावहारिक ज्ञान देकर उसके निरंतर अभ्यास द्वारा उनका पारिवारिक, सामाजिक एवं व्यावसायिक जीवन सुखी, सुखद और सफल बनाने में सहायक होगी।
About Author :३० अक्तूबर, १९२० को बर्मा के मै:टोला शहर में जनमी श्रीमती मानवती आरय जीवन के प्रथम छब्बीस वर्ष वर्मा में बिताते हुए वर्मा और अंग्रेजी में ही औपचारिक शिक्षा प्राप्त की । अध्ययन, अध्यापन, लेखन और जन-संपर्क इनके बचपन से आज तक के शौक बने रहे। नेताजी सुभाष चंद्र बोस एक मामला आन के प्रेरक सान्निध्य में तन-मन-धन से समर्पित होकर स्वातंत्र्य संग्राम में भाग ले सकने के सुयोग को, युद्ध की विभीषिकाओं के बावजूद, ये अपने युवा जोवन का सर्वोत्तम अंश और कृष्ण चंद्र आर्य की जीवन साथी तथा विपश्यना साधक होने को अपने व्यक्तिगत जीवन का परम सौभाग्य मानती हैं।
संप्रति :जनहित के कार्यों में निष्काम भाव से व्यस्त रहती हैं।
सन् १९१९ को विजयदशमी के दिन दिल्ली में जनमे श्री कृष्ण चंद्र आयं में देशभक्ति तथा समाज-सेवा की भावना अपने पिताजी के साथ आर्य समाज के कार्यकर्ता के रूप में जाযरतु हुई थी।'भाषण देने और लेखन कार्य करने में शैक्षणिक डिग्रियों का अभाव बाधक नाीं हो सकता। ' यह बात इन्होंने अपने स्वाध्याय से योग्यता अर्जित करके सिद्ध कर दी और पत्रकारिता को अपनी जीविका का साधन बनाकर अपने घर परिचार तगा देश व समाज के प्रति अपना कर्तव्य निभाने में सफल रहे। बातचीत की कला' में इन्होने अपने जीवन के अनुभवों कासार प्रस्तुत किया है।
Book format :Paperback.
Language : Hindi
Book genre : Nnon fiction , Self help , Education
Number of pages :160
Publisher : Prabhat paerbacks
ISBN :978-93-5186-752-4.
Subscribe now :https://www.borrowbuybooks.com/subscription
Whats on your mind ? : https://www.borrowbuybooks.com/leave-your-query
