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About Book : हिन्दुस्तान की कहानी' पंडित जवाहरलाल नेहरू की सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय कृतियों में से है। उन्होंने इसे अपनी नवों और सबसे लम्बी कैद (9 अगस्त, 1942 से 15 जून, 1945) के दिनों में पांच महीनों के भीतर लिखा था। जेल की दीवारों में बंद होने पर भी पंडितजी इस पुस्तक में भारत की खोज की यात्रा पर निकल पड़ते हैं। वह हमें ईसा के कोई दो हजार साल पहले के उस जमाने में ले जाते हैं, जब सिंध की घाटी में एक विकसित और सम्पन्न सभ्यता फल- फूल रही थी, जिसके खंडहर आज भी हमें मोहनजोदड़ो, हड़प्पा तथा अन्य स्थानों पर मिलते हैं. वहां से इतिहास के विभिन्न और विविध दौरों का परिचय कराते हुए वह हमें आधुनिक काल और उसकी बहुमुखी समस्याओं तक ले आते हैं। और फिर भविष्य की झांकी दिखाकर हमें खुद सोचने और समझने के लिए कहते हैं।वह हमें भारत की शक्ति के उस अक्षय स्रोत से अवगत कराते हैं, जिसके कारण हमारा देश संघर्षों और हलचलों, उथल-पुथल और कश-मकश, साम्राज्य और विस्तार, पतन और गुलामी, विदेशी हमलों और आंतरिक क्रांतियों आदि के बावजूद जिंदा बना रहा है। लेखक का अध्ययन सभी दृष्टिकोण से-ऐतिहासिक, राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक, दार्शनिक, वैज्ञानिक, सांस्कृतिक, राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय-कोई भी पहलू उनको पैनी निगाह से नहीं बच पाया है साथ ही पुस्तक में पाठकों को नेहरूजी की वह व्यक्तिगत छाप भी मिलती है, जिससे इस किताब को आत्मकथाओं की रोचकता, गति और सहृदयता से विभूषित कर दिया है। पुस्तक 1945 में लिखी गई थी। उस समय पंडितजी ने, जिसे निकट भविष्य कहा था, वह आज वर्तमान हो गया है। पाठकों को पंडितजी के कई निष्कर्ष आज घटित होते हुए साफ दिखाई दे रहे हैं। यह पुस्तक लेखक की विश्वविख्यात 'दि डिस्कवरी ऑव इंडिया' का अनुवाद है। पाठकों को सम्भवतः पता होगा कि इसका संसार की लगभग सभी प्रमुख भाषाओं में अनुवाद हो चुका है और सभी जगह यह बड़ी लोकप्रिय हुई है। हिंदी में भी इसका बहुत अच्छा स्वागत हुआ है। पहला संस्करण कुछ हो समय में समास हो गया था और दूसरा संस्करण भी जल्दी ही निकल गया था हमें हर्ष है कि पाठकों को अब इसका संस्करण नये रूप में सुलभ हो रहा है। अंग्रेजी से यह अनुवाद श्री रामचंद्र टंडन ने और कुछ अंश का श्री सुरेश शर्मा ने किया है। हम इनके आभारी हैं। कहने की आवश्यकता नहीं कि पिछले संस्करण में अनुवाद पूर्णत: दुहरा लिया गया था और कई नक्शे तथा चित्र इसमें जोड़ दिये थे। इस बार भी पुस्तक की भाषा के बारे में विशेष सावधानी रखी गई है। इस पुस्तक का संक्षिप्त संस्करण भी 'मण्डल' से प्रकाशित हुआ है और उसकी कई आवृत्तियां हो चुकी हैं। हमें आशा है, पिछले संस्करणों की भांति यह संस्करण भी पाठकों को पसंद आयगा और वे इसे चाव से पढ़ेंगे।
About Author : Jawahar lala nehru
Translator : Ramchandra Tandon & Suresh Sharma
Book format: Paperback
Language: Hindi
Book Genre: Non fiction, Historical
Number of pages: 660
Publisher: Sasta Sahitya mandal
ISBN : 978-81-7309-33-5
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