Why Borrow ? : Avoid repeated cost on books buying or renting .You can take more risks in reading because you don’t have to commit to buying everything you read.If you don’t like a book, just take it back. Borrow Now
About Book : राम विलास शर्मा (1912-2000) बीसवीं सदी में प्रेमचंद के बाद दूसरे बड़े साहित्यकार हैं, जिन्होंने देश में सामंतवाद और साम्राज्यवाद से जीवन भर वैचारिक संघर्ष किया। उनका विपुल आलोचना साहित्य न केवल हिंदी आलोचना, बल्कि भारतीय आलोचना को समृद्ध करने वाला और दिशा देने वाला है। उन्होंने अपने आलोचना लेखन से यह सिद्ध किया कि यह कितने बड़े सामाजिक दायित्व का काम है । उनकी आलोचना का स्वर इतना अर्थपूर्ण और बहुआयामी है कि उसमें हिंदी साहित्य की समस्त उन्नति तो झलकती ही है, हिंदुस्तान की सांस्कृतिक अंत:शक्ति के भी दुर्लभ दर्शन होते हैं। आलोचना के अलावा इतिहास, राजनीति, दर्शन, समाज विज्ञान, भाषा विज्ञान पर उन्होंने इतना ज़्यादा और अर्थपूर्ण लिखा है कि सहसा विश्वास नहीं होता कि इतना सब एक ही व्यक्ति का काम है। कई प्रगतिवादी लेखकों से टकराते हुए हिंदी प्रदेश और भारत की सांस्कृतिक विरासत का उन्होंने एक नया मूल्यांकन प्रस्तुत किया। उन्होंने भक्ति साहित्य को लोक जागरण के साहित्य का गौरव दिया तो हिंदी नवजागरण की रोशनी में भारतेंदु हरिश्चंद्र, महावीर प्रसाद द्विवेदी, प्रेमचंद, रामचंद्र शुक्ल और निराला का विस्तृत मूल्यांकन भी सामने रखा। छायावाद के प्रति भी उनका नज़रिया प्रगतिवादी आलोचकों से भिन्न था। उन्होंने भाषा विज्ञान के क्षेत्र में पुराने निष्कर्षों को चुनौती देकर भारत के प्राचीन भाषा परिवार की संकल्पना रखी और हिंदी जातीय निर्माण की वास्तविकता का उद्घाटन किया।
- About Author : विनिबंध लेखक शंभुनाथ हिंदी के प्रतिष्ठित आलोचक हैं। कोलकाता विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्रोफ़ेसर । केन्द्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के निदेशक रहे । प्रेमचंद का पुनर्मूल्यांकन, बौद्धिक उपनिवेशवाद की चुनौती और रामचंद्र शुक्ल, संस्कृति की उत्तरकथा, दुस्समय में साहित्य, हिंदी नवजागरण और संस्कृति आदि दर्जन भर कृतियाँ प्रकाशित । समकालीन सृजन पत्रिका के संपादक ।
- Book format : Paperback
- ISBN : 978-81-260-3083-5
- Language: Hindi
- Book Genre: Literary criticism
- Publisher: Sahitya Akademi
- Subscribe now :https://www.borrowbuybooks.com/subscription
