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About Book : वस्तुतः 1950 के बाद की हिंदी कविता का रचनात्मक केंद्र अज्ञेय की पीढ़ी में लक्षित होता है, जो परवर्ती विकास में अपना स्वरूप ग्रहण करता दिखाई पडता है। उनके द्वारा संपादित तीनों सप्तकों के अनेक कवि स्वाधीनता के बाद की हिंदी कविता के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कवियों में स्वीकार किए गए। मुक्तिबोध और रधुवीर सहाय की कविताओं ने यहाँ लोकतंत्र की विसंगतियों, विडंबनाओं को एक नए शिल्प में प्रस्तुत कर युवतर कवियों को प्रभावित किया तो नागार्जुन और त्रिलोचन जैसे कवियों की पुनप्रतिष्ठा ने इस अवधि के अनेक कवियों को देशज यथार्थ और लोक जीवन की ओर भी उन्मुख किया।
सातवें दशक के मध्य में नई कविता की मुख्यधारा में एक विक्षेप की स्थिति उत्पन्न हुई। चीनी हमले में पराजित भारत (1962) और नक्सलबाड़ी आंदोलन (1964 के बाद) के बाद की हिंदी कविता में भी इन दुःस्वप्नों की स्पष्ट गूँज सुनाई पड़ती है तथा काव्य-शिल्प में वह आक्रमकता, अराजकता और बड़बोलेपन के रूप में दिखाई पड़ती है। मगर यह दुःस्वप्न बहुत जल्दी टूट गया और आठवें दशक तथा बाद की कविता एक नए रूप में उभरी है, जिसमें जीवन और प्रकृति के प्रति आस्था है. पारिवारिक रिश्तों के प्रति आत्मीयता है और पृथ्वी तथा पर्यावरण के प्रति चिंता भी।
अपने समय की चुनौतियों का सामना करने वाली इन कविताओं का फलक बहुत विस्तृत है। अपने आसपास की ही नहीं, बल्कि सारी दुनिया में हो रहे परिवर्तनों की आहटें इनमें सुनाई पड़ती हैं। प्रस्तुत संकलन में इसकी एक झलक मात्र है।
About Editor : विश्वनाथ प्रसाद तिवारी (1940) प्रसिद्ध कवि, आलोचक एवं संपादक हैं। गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के आर्चाय एवं अध्यक्ष पद से 2001 में सेवानिवृत्त तिवारी जी वर्तमान में साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष हैं आपके 7 कविता-संग्रह, शोध एवं आलोचना की 11 पुस्तकें, आत्मकथा, डायरी, यात्रा संस्मरण, साक्षात्कार आदि की 7 पुस्तकें प्रकाशित हैं दस्तावेज़ जैसी महत्त्वपूर्ण पत्रिका के संपादन के अलावा आपने 14 पुस्तकों का संपादन भी किया है। आपकी रचनाओं के अनुवाद ओडिया पंजाबी, मलयाळम, मराठी, बाङ्ला, गुजराती, तेलुगु, कन्नड, उर्दू के अतिरिक्त अंग्रेजी, रूसी, नेपाली में भी हुए हैं। व्यास सम्मान, पुश्किन सम्मान के अतिरिक्त आप उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के हिंदी गौरव तथा साहित्य भूषण सम्मान से सम्मानित हैं।
About Co Editor : रेवती रमण (जन्म 1955) बी आर. आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के हिंदी विभाग में आचार्य । आलोचना पर एक दर्जन से अधिक पुस्तकें। चचिंत पुस्तकें हैं- हिंदी आलोचना: बीसवीं शताब्दी, जातीय मनोभूमी की तलाश एवं सर्जक की अंतर्दृष्टि।
ISBN : 978-81-260-4012-4
Book format: Hardcover.
Language: Hindi
Book Genre: Literary Poem Collection.
Number of pages: 248
Publisher: Sahitya akademi.
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