Parshuram Ki Pratiksha By Ramdhari Singh Dinkar

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  • Author Name : Ramdhari Singh Dinkar
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  • Book condition : Good condition preloved book

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About Book :इस संग्रह में कुल अठारह कविताएं हैं, जिनमें से पन्द्रह ऐसी हैं जो पहले किसी भी संग्रह में नहीं निकली थीं। केवल तीन रचनाएँ 'सामधेनी' से लेकर यहाँ मिला दी गयी हैं। यह इसलिए कि इन कविताओं का असली समय अब आया है।नेफ़ा-युद्ध के प्रसंग में भगवान् परशुराम का नाम अत्यन्त समीचीन है। जब परशुराम पर मातृ -हत्या का पाप चढ़ा, वे उससे मुक्ति पाने को सभी तीर्थों में घूमते फिरे, किन्तु, कहीं भी परशु पर से उनकी वज्रमूठ नहीं खुली यानी उनके मन से से पाप का भान नहीं दूर हुआ। तब पिता ने उनसे कहा कि कैलास के समीप जो ब्रह्मकुण्ड है, उसमें स्नान करने से यह पाप छूट जायगा। निदान, परशुराम हिमालय पर चढ़कर कैलास पहुंचे और ब्रह्मकुण्ड में उन्होंने स्नान किया । ब्रह्मकुण्ड में डुबकी लगाते ही परशु उनके हाथ से छूट कर गिर गया अर्थात् उनका मन पाप-मुक्त हो गया।

तीर्थ को इतना जाग्रत देखकर परशुराम के मन में यह भाव जगा कि इस कुण्ड के पवित्र जल को पृथ्वी पर उतार देना चाहिए । अतएव, उन्होंने पर्वत काट कर कुण्ड से एक धारा निकाली, जिसका नाम, ब्रह्मकुण्ड से निकलने के कारण, ब्रह्मपुत्र हुआ। ब्रह्मकुण्ड का एक नाम लोहित-कुण्ड भी मिलता है। एक जगह यह भी लिखा है कि ब्रह्मपुत्र की धारा परशुराम ने ब्रह्मकुण्ड से ही निकाली थी, किन्तु, आगे चलकर वह धारा लोहित-कुण्ड नामक एक अन्य कुण्ड में समा गयी। परशुराम ने उस कुण्ड से भी धारा को आगे निकाला, इसलिए, ब्रह्मपुत्र का एक नाम लोहित भी मिलता है। स्वयं कालिदास ने ब्रह्मपुत्र को लोहित नाम से ही अभिहित किया है । और जहां ब्रह्मपुत्र नदी पर्वत से पृथ्वी पर अवतीर्ण होती है, वहाँ आज भी परशुराम कुण्ड मौजूद है, जो हिन्दुओं का परम पवित्र तीर्थ माना जाता है ।

About author : Ramdhari singh dinkar 

Book Format : Paper Back 

Book genre : Literary Poem 

Pages : 80

ISBN : 81-85341-13-3.

Publisher: Lokbharti Prakashan

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