Abul Kalam Azad By Abdul Qavi Desnavi

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Why Borrow ? : Avoid repeated cost on books buying or renting .You can take more risks in reading because you don’t have to commit to buying everything you read.If you don’t like a book, just take it back. Borrow Now

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  • About Book : भारत के स्वाधीनता-संग्राम का एक सिरा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बुनियाद से जुड़ा हुआ है। इस संग्राम के अत्यंत साहसी सिपाही और देश की स्वाधीनता के मतवाले मौलाना अबुल कलाम आजाद (1888 1958) की जीवन-गाथा भी इसी के साथ शरू होती और साथ-साथ आगे बढ़ती है। सन 1885 में कांग्रेस की स्थापना के केवल तीन वर्ष बाद मौलाना आजाद का जन्म मक्का में हुआ, जहाँ से 1895 ई. में वे भारत आए। 1903 ई. में शिक्षा समाप्त करने के बाद अपने पिता के उत्तराधिकारी बनने के बजाए ये स्वाधीनता-सेनानी बनकर युद्ध-क्षेत्र में उतरने की तैयारी करने में जुट गए। बंग-विभाजन से प्रभावित होकर क्रांतिकारियों के मार्गदर्शक श्यामसुंदर चक्रवर्ती से उनका परिचय हुआ। इस्लामी देशों की यात्रा के दौरान उन्होंने वहाँ के क्रांतिकारियों से निकटता स्थापित की । वापस आकर उन्होंने 13 जुलाई 1912 ई. से अपना अखबार 'अल हिलाल' जारी किया और एक समर्पित पत्रकार के रूप में स्थापित हो गए। इसी के साथ वे भारत के स्वाधीनता-संग्राम-पथ पर अग्रसर हुए और फिर अंग्रेजों के विरुद्ध भारतीय जनता को संगठित करने के कार्यक्रम में व्यस्त हो गए। उनकी पहली नज़रबंदी 1916 ई. में हुई। आने वाले तीस वर्षों में लगभग दस साल का जीवन उन्होंने लोहे की सलाखों के पीछे काटा। जेल से बाहार आने के बाद उनका शेष जीवन स्वाधीनता-संग्राम के लिए समर्पित हो गया। खिलाफत आंदोलन, नमक सत्याग्रह, सविनय अवज्ञा आंदोलन, असहयोग आंदोलन, स्वदेशी आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन ही नहीं, हर मोड़ और हर मौके पर देश के लिए त्याग और बलिदान की हर घड़ी में अबुल कलाम आज़ाद गहन निष्ठाऔर साहस के साथ दिखाई देते हैं। शैक्षिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक और धार्मिक संस्थानों एवं स्वतंत्र भारत सरकार को शिक्षा मंत्री के रूप में दी गई उनकी संवाएँ निस्संदेह आज भी बहुत महत्व रखती हैं और कल भी उनका महत्त्व ऐसा ही रहेगा।
  • Book format : Paperback 
  • ISBN : 978-81-260-1408-3.
  • Language: Hindi
  • Book Genre: Biography
  • Number of pages :97
  • Publisher: Sahitya akademi 
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