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- About Book - संसार के इतिहास में जिन लोगों के वक्तव्य और जीवन का उनके बाद के लोगों पर अमिट प्रभाव पड़ा उन लोगों में ग्रीक दार्शनिक, सुकरात, का नाम लिया जा सकता है। उन्होंने पहले-पहल परंपरा से हटकर सत्य की खोज की। उस युग में रूढ़ियों, परंपराओं और संस्कारों के विरुद्ध विद्रोह करने के कारण सुकरात को विष का प्याला पीकर मृत्यु को गले लगाना पड़ा। सुकरात का मुकदमा और उनके मृत्यु दंड की कहानी अद्भुत और रोमांचकारी है। प्रस्तुत पुस्तक में सुकरात के लगभग ढाई हजार वर्ष पूर्व दिये वक्तव्यों और मान्यताओं का वर्णन भी किया गया है। तब की और आज की परिस्थितियों में अधिक अंतर नहीं है, इसीलिए सुकरात का चिंतन आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
- About author - मन्मथनाथ गुप्त (1908) का जन्म वाराणसी में हुआ। ये स्वतंत्रता के क्रांतिकारी आंदोलन के क्रियाशील सदस्य रहे। इनके 80 से अधिक ग्रंथ प्रकाशित हो चुके हैं। हिन्दी कथा साहित्य और समीक्षा के क्षेत्र में इनका विशेष योगदान हैं। इनकी कुछ प्रमुख कृतियां हैं-कथाकार प्रेमचंद; प्रगतिवाद की रूपरेखा; बहता पानी; क्रांतिकारी युग के संस्मरण; साहित्य, कला, समीक्षा आदि।
- About Author : Manmathnath Gupta
- ISBN : 978-81-237-2934-3.
- Book format: Paperback
- Language: Hindi
- Book Genre: Historical
- Number of pages: 161
- Publisher: National Book trust.
- Dimension :8.50 X 5.50 INCH
- Weight :220gm
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