Shikanje ka Dard By Sushila Takbhaure

0 (0 Reviews)
MRP.495 Rs. 243
  • Availability : In Stock
  • Author Name : Sushila Takbhourey
  • Available to : Purchase / Borrow
  • Book condition : Good condition preloved book

Why Borrow ? : Avoid repeated cost on books buying or renting .You can take more risks in reading because you don’t have to commit to buying everything you read.If you don’t like a book, just take it back. Borrow Now

  • About Book :शिकंजा यानी पंजा, जिसकी जकड़न में रहकर कुछ कर पाना कठिन हो। शिकंजा यानी कठघरा जिसमें कैद होकर उसके बाहर जाना कठिन हो। शब्दकोश में दिए अर्थ के अनुसार शिकंजे का अर्थ दवाने, कसने का यंत्र है। शिकंजे का अर्थ एक प्रकार का प्राचीन यंत्र है जिसमें अपराधी की टॉँग कस दी जाती है। शिकंजा वह यंत्र है जिसमें धुनकने के पहले रुई को कसा जाता है। शिकंजे का अर्थ कोल्हू भी है। जिस तरह किसी ताकतवर को शिकंजे में जकड़कर उसकी पूरी ताकत को नगण्य बना दिया जाता है, उसी तरह मुझे भी सामाजिक जीवन की मनुवादी विषमता ने, वर्णवादी-जातिवादी समाज व्यवस्था ने शिकंजे में जकड़कर रखा, जिसका परिणाम पीड़ा-दर्द, छटपटाहट के सिवा कुछ नहीं है। सदियों के मूक मानव अब बोलने लगे हैं, अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने लगे हैं, प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए अपनी व्यथा-कथा लिखने लगे हैं। फिर भी, क्या प्रत्येक दलित पीड़ित को उसके मानवाधिकार मिल सके? अभी भी दलित शोषण की घटनाएँ क्या नहीं घटती हैं? विषमतावादी भारतीय समाज में जातिभेद, ऊँच-नीच की भावनाएँ क्या अब नहीं हैं? शिकंजे का दर्द में संताप है दलित होने का, स्त्री होने का। इसमें शोषित, पीड़ित, अपमानित, अभावग्रस्त दलित जीवन की व्यथा है। स्त्री होना ही जैसे व्यथा की बात है। चाहे हमारा देश हो या विश्व के अन्य देश, हर जगह शोषण उत्पीड़न का शिकार स्त्री ही रही है। जिस देश में वर्णभेद, जातिभेद की कलुषित परम्पराएं हैं वहाँ दलित स्त्री शोषण की व्यथा और भी गहरी हो जाती है। सदियों से तिरस्कृत और अभावग्रस्त परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर किये गये दलित जीवन की व्यथा-कथा का दर्द शिकंजे के दर्द में समाहित है। 'शिकंजे का दर्द लिखने का उद्देश्य दर्द देने वाले शिकंजे को तोड़ने का प्रयास है।
  • About Author : म.प्र दलित साहित्य अकादमी विशिष्ट सेवा सम्मान एवं पुरस्कार' और रमणिका फाउंडेशन की ओर से 'सावित्री बाई फुले' सम्मान एवं पुरस्कार से  पुरस्कृत । सुशीला टाकभौरे का जन्म 4 मार्च 1954,  बानापुरा ( सिवनी मालवा), होशंगाबाद ( मध्यप्रदेश) में हुआ । एम.ए.   (हिन्दी) पीएच.डी.(अम्बेडकर विचारधारा) में किया  । साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में सृजनात्मक गतिविधियाँ एवं दलित समाज और नारी की स्थिति पर परिवर्तनवादी आन्दोलन में वैचारिक सक्रियता में संलग्न। फिलहाल, सेठ केसरीमल पोरवाल कॉलेज, कामठी (महाराष्ट्र) में अध्यापन ।
  • ISBN :978-93-5000-719-8.
  • Book format: Hardcover
  • Language: Hindi 
  • Book Genre: Autobiography.
  • Number of pages: 304
  • Publisher: Vani Prakashan.
  • Dimension :20 x 14 x 4 cm.
  • Weight :480gm.
  • Subscribe now :https://www.borrowbuybooks.com/subscription
  • What’s on your mind ? : https://www.borrowbuybooks.com/leave-your-query

 

Check your subscription plan


Learn more Whatsapp your query

Buy Now