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About book :अदब का ताल्लुक दिल के रिश्ते से होता है, हमारे अहसास की पैमाइश और गहराई की अभिव्यक्ति कोई लफ़्ज नहीं बल्कि जज़्बातों का सैलाब होता है, जिसे हम जीते हैं, महसूस करते हैं। ज़िन्दगी इन्हीं खडट्टे-मीठे तजुरबों की कहानी बन जाती है। कुछ कलन्दर इसे अपने इशारे पर नचाते हैं और कुछ को ये। उर्दू अदब की दौलत ऐसे दीवाने-फनकारों से हमेशा लबरेज़ रही है जिन्होंने अपनी कहानी को लफ़्जों के दस्तावेज़ से रोशन किया है। निदा फ़ाज़ली की 'चेहरे' उर्दू अदब के ऐसे ही मस्त-कलन्दरों की जिन्दगी की आपबीती है। मशहूर शाइरों का अन्दाज़े-बयां, उनका तौर-तरीका, ख्वाहिशें, हसद, मोहब्बतें, चाल-चलन, सादगी, रवानी, मिठास और लोच को निदा फ़ाज़ली की कलम जिस तरह से बयां करती है वो कमाल है । लगता है ये किसी का जाति मामला नहीं बल्कि हमारा ही आईना है जिसमें हमें अपना ही चेहरा दिखाई देता है। निदा फ़ाज़ली के अन्दाज़ में खूबसूरती और सलीके का मिश्रण है आप जानते हैं आपको कब-कब क्या कहना है। 'चेहरे' निदा भाई के अपने संस्मरण हैं जो अब हमारा भी हिस्सा हैं
About Author : निदा फ़ाज़ली शाइरी की तरह अदबी दुनिया में अपने खूबसूरत गद्य से भी पहचाने जाते हैं, विषय चाहे कैसा भी हो उनका अन्दाज़ उसे सुन्दर और पठनीय बना देता है। अब तक की उनकी शाइरी के कई संकलनों के साथ गद्य की लोकप्रिय पुस्तकों में 'दीवारों के बीच' और 'दीवारों के बाहर' (आत्मकथात्मक उपन्यास दो हिस्सों में), 'मुलाकातें' (आलोचना), 'तमाशा मेरे आगे' और ताज़ातरीन 'चेहरे' के नाम लिए जा सकते हैं। दिल्ली में 1940 में जन्मे निदा फ़ाज़ली ने ग्वालियर में एम.ए. उर्दू हिन्दी की डिग्री प्राप्त की। उनकी कविता और गद्य में जो भाषा है वह न केवल उर्दू हिन्दी का विवाद समाप्त करती है बल्कि आम बोलचाल की बोली को रचनात्मक स्तर भी प्रदान करती है। साहित्य अकादमी, शिखर सम्मान, खुसरो पुरस्कार, ग़ालिब पुरस्कार जैसे कई पुरस्कारों से सम्मानित निदा फ़ाज़ली फिल्मों, सीरियलों और विभिन्न गायकों की आवाज़ों में अपने गीतों, ग़ज़लों, नज़्मों और दोहों से जाने जाते हैं। वह शाइर और गद्यकार होने के अलावा अनुवादक और कई चर्चित पुस्तकों के सम्पादन के लिए भी मशहूर हैं। उनकी रचनाएँ हिन्दी/उर्दू की कई पाठ्य पुस्तकों में भी शामिल हैं। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात निदा फाज़ली की रचनाओं और पुस्तकों का अनुवाद कई देशी-विदेशी भाषाओं में हो चुका है। निदा फ़ाज़ली का साहित्य उनकी ज़िन्दगी का आईना है, वह जो जीते हैं वही लिखते हैं। यही विशेषता उन्हें भीड़ में अलग पहचान देती है। उनके कई शेर और दोहे हमारी रोज़मर्रा की भाषा में मुहावरों का रूप ले चुके हैं।
Book format : Paperback
Book genre : Biography
Number of pages : 202
Publisher : Vani Prakashan
ISBN : 978-93-5229-121-2
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