Vo Tera Ghar Ye Mera Ghar By Malti Joshi

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  • Author Name : Malti Joshi
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  • Book condition : Good condition preloved book

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About Book : Short story collection by malti joshi - (Form book) . प्रतिरोध -उसके पूरे बदन पर जैसे छिपकलियाँ रेंग रही थीं। ननदोई का लिजलिजा स्पर्श याद करके उसे उबकाई आ रही थी। उनकी कामलोलुप दृष्टि मानो अब तक उसका पीछा कर रही थी और वासना में सने शब्द अब तक कानों में झनझना रहे थे, उस समय मन तो हुआ था कि एक तमाचा जड़ दे, पर रिश्ते आड़े आ गए। इसलिए सिर्फ धमकाकर छोड़ दिया। बदले में उन्होंने भी धमकी दे डाली थी, 'शिकायत करके तो देखो, इतना बदनाम कर दूंगा कि कहीं मुँह दिखाने लायक नहीं रहोगी। एक क्षण को मीरा सहम गई थी। अभी तो शादी को कुल जमा छह महीने हैं और वह कैसे हुए दुष्चक्र में फँस गई है ! उसकी शादी के बाद ननद पहली बार सपरिवार घर आई है। उन लोगों की खातिरदारी में उसने कोई कसर नहीं छोड़ी। सुबह-शाम पकवान बना रही है। ननद को पानी का गिलास तक नहीं उठाने देती। अपनी अलमारी उसने दीदी के लिए खुली रख छोड़ी है, जो चाहे निकालें और पहनें। बड़ी मन्नतों से पाए उसके बच्चे पर पूरी माया-ममता लुटा रही है। उसकी शैतानियों को नजरअंदाज कर रही है, उसकी शरारतों को बख्श रही है। पर पता नहीं क्यों ननदोई के साथ वह सहज नहीं हो पाई। उसके अंतर्मन ने उसे सचेत कर दिया था कि इस आदमी की नजर साफ नहीं है। इससे सावधान रहने की जरूरत है। शायद उसकी यही कोशिश उनके अहं को आहत कर गई थी। उनका पौरुष-दर्प इस अवमानना से तिलमिला उठा था और शायद इस अपमान का बदला चुकाने के लिए ही वे मौके की तलाश में रहे हों। वह शाम के खाने की तैयारी में व्यस्त थी। दोपहर का खाना खाकर सुयश रोज की तरह दुकान चले गए थे। अम्माजी बिटिया को लेकर सुनार के पास गई थीं। महरी भी काम निबटाकर जा चुकी थी। उसी समय उन्होंने रसोई की चौखट पर खड़े होकर आवाज दी, "क्यों, एक कप चाय मिल सकेगी क्या ?" उसका जी धक से रह गया। पहली बार उसे एहसास हुआ कि वह घर में बिलकुल अकेली है। 

About Author : Malti joshi 

Book format: Paperback.

Language: Hindi.

Book Genre: Litrerary fiction shortstories.

Number of pages: 91

Publisher: Parmeshwari Prakashan.

Book Availability : Available for Read & Return.

ISBN : 978-93-80048-99-4 

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