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About Book :दलित कहानी संचयन छह भारतीय भाषाओं में लिखित अड़तालीस कहानियों का प्रतिनिधि संकलन है ये कहानियों दलित वर्ग के लेखकों द्वारा रचित ऐसी रचनाएँ हैं, जो दलित जीवन की यातना, पीड़ा. आक्रोश, प्रतिरोध और संघर्ष की संवेदना से पगी है भीतर और बाहर दोनों तरफ जूझनेवाली इन कहानियों का मुख्य आधार कला या शैली नहीं वरन भाषा और कथ्य हैं। अमानवीय जुल्म, अत्याचार और सहनशीलता को वाणी देनेवाली ये कहानियाँ अपना एक अलग ही सौन्दर्य-शास्त्र गढती दिखाई देती हैं। इन कहानियों में दलित जीवन के कई कोण है-जीवन से जूझने के जिन्दा रहने के पीड़ा सहने के और उससे उबरने के ।समय के लम्बे अन्तराल को छूती प्रस्तुत संकलन की कहानियों में दलित चेतना के उदय से लेकर संकल्प बनने तक का विकास उजागर होता है। गुलाम हूँ में का अहसास डंक मारता दिखता है तो उस अहसास से मुक्ति की छटपटाहट भी कुलबुलाती नजर आती है और नजर आता है यह सपना, जाति नहीं, मनुष्य हूँ मैं-समाज का साझेदार हैं मैं-औरों की तरह मेरी भी जीने की शर्ते हैं। यही मुक्ति-स्वप्न इन कहानियों को दिशा देता है। कहीं वह 'अप्पदीपो भव बनकर रोशन हो जाता है और अंधेरे को काटने लगता है तो कहीं संगठित होकर योजना बनाता है और कहीं सीधे संघर्ष में उतरकर राह तैयार करता है।
About Author : जन्म : 22 अप्रैल, 1930; सुनाम (पंजाब)। शिक्षा : एम.ए., बी.एड.।
रमणिका गुप्ता बिहार/झारखंड की विधायक एवं विधान परिषद् की सदस्य रहीं। कई ग़ैर-सरकारी एवं स्वयंसेवी संस्थाओं से सम्बद्ध तथा सामाजिक, सांस्कृतिक व राजनैतिक कार्यक्रमों में सहभागिता। आदिवासी, दलित, महिलाओं व वंचितों के लिए आजीवन कार्यरत। कई देशों की यात्राएँ। विभिन्न सम्मानों एवं पुरस्कारों से सम्मानित जिनमें ‘गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार’, ‘आजीवन आदिवासी बंधु पुरस्कार’ भी शामिल हैं।
प्रकाशित कृतियाँ : अब तक 16 कविता-संग्रह, दो उपन्यास, दो कहानी-संग्रह, दो कहानी-संग्रह सम्पादित, एक यात्रा-संस्मरण और दो आत्मकथा—‘आपहुदरी’ व ‘हादसे’।
ISBN : 81-260-1700-7.
Book format: Hardcover
Language: Hindi
Book Genre: Literature fiction shortstories .
Number of pages: 400
Publisher: Sahitya prakashan.
Weight : 717gm
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