Ishq mein sehar hona By Ravish kumar

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  • Author Name : Raveesh kumar
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About Book : हमने शहर को हमेशा गाँव की नज़र से देखा है जहाँ जाकर लोग गाँव को भूल जाते हैं। शहर मेरी जिन्दगी में गाँव बनाम शहर के रूप में आया। तब तक शहर हमारे लिए एक अस्थायी पता भर था हम 'स्थायी पता' के कॉलम में गाँव का पता भरते थे। शहर के डेरे का नहीं। हर मौके पर बिहार की राजधानी पटना से मोतिहारी जिले के गाँव जितवारपुर लौटना होता था। हर वक़्त घर और डेरा का फ़र्क बना रहता था। घर मतलब गाँव, डेरा मतलब शहर।

जब भी गाँव लौटकर आना होता था, उलाहनों की पूरी सीरीज़ तैयार होती थी। बड़े-बुजुर्ग कहते थे कि गाँव ही अपना है। यही तुम्हारा वजूद है। गाँव को ही जानो-पहचानो। शहर तो तुम्हें बिगाड़ रहा है। गाँव ही बनाएगा। गाँव ही बचाएगा। हम भी खुद को बचाकर रखते थे कि कोई पूरी तरह शहरी न समझ ले। पूरी कोशिश करते थे कि शहर न हो जाएँ। शहर होने का मतलब गाँव से विश्वासघात। उस जमीन से धोखा जिसे मेरे पुरखों ने सींचा था। अपना खेत और पेड़न पहचानने पर बाबूजी से डाँट पड़ जाती थी ऐसा लगता था कि मेरे आस-पास की दुनिया मुझे शहर से बचाकर रखना चाहती थी लेकिन मैं गाँव को बचाए रखते हुए शहर को खोजना चाहता था।

गाँव से शहर लौटने पर घर से बाहर निकलने की तमाम नई बन्दिशें लागू हो जाती थीं। सूरज डूबने से पहले घर आ जाना है। बहुत दूर के किसी मोहल्ले में यारी-दोस्ती के लिए नहीं जाना है। सिनेमा जाने की छूट इस शर्त के साथ मिलती थी कि शाम से पहले आ जाना है। देर रात की फ़िल्में नहीं देखनी हैं। बुरे चरित्रवाले ही इतनी रात तक सिनेमा देखते हैं। कोई साइकिल छीन लेगा तो कोई भगा ले जाएगा। दोपहर में दरवाज़े-खिड़कियाँ सब बन्द हो जाती थीं। हम्बूराबी' के नियम जैसा बन गया था कि बाबूजी के लौटने से पहले सबको लौट आना है। गाँव में ऐसा कोई नियम नहीं था। इसलिए हमने बचपन में गाँव को खूब खोजा है। वहाँ ग़ैर का भी अपना होता था और शहर में सिर्फ अपना ही अपना होता है।( इसी पुस्तक से )

About Author : रवीश कुमार , आमतौर पर लोगों के दिलों में एनडीटीवी वाले रवीश' के नाम से एक बड़ी पहचान । टीवी. पत्रकारिता के 18 वर्षों के निरन्तर सफ़र में शब्दों और दृश्यों के विभिन्न संसार को रचने वाले। बिहार के मोतिहारी जिले के गाँव जितवारपुर से चलकर दिल्ली शहर में 'स्थाई पता की तलाश करने वाले। लप्रेक का नया कॉन्सेप्ट शुरू करने वाले। 'वन रूम सेट का रोमांस' जैसी लम्बी कहानी किश्तवार लिखने वाले क़स्बा' के ब्लॉगर ।

आज के हमारे समय में इनका सबसे बड़ा परिचय- 'रवीश की रिपोर्ट' वाले रवीश कुमार।

ISBN : 9788126727674.

Book format: Paperback

Language: Hindi 

Book Genre: Fiction stories collection .

Number of pages: 102

Publisher: Rajkamal prakashan 

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