Bhojpuri Lokkatha by Mithileshwar

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  • Author Name : Mithileshwar
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About Book :किसी भी जनपद की सांस्कृतिक चेतना और पारंपरिक आहार-व्यवहार वहां के लोक-कंठ में व्याप्त गीतों, कथाओं में पल्लवित पुष्पित होते हैं। जीवन-जगत की सार्थक व्याख्या का अक्षय कोश लोक-साहित्य में ही सुरक्षित और विकसित होता है। भोजपुरी जनपद इसका अपवाद नहीं है । उस संस्कृति की वास्तविक पहचान वहां के लोक-साहित्य से ही संभव है। भोजपुरी समाज के रीति-रिवाज, पर्व-त्योहार, कोहबर चित्र, पीड़िया चित्र, भित्ति चित्र आदि में तो भोजपुरी भाषी नागरिक की सांस्कृतिक विरासत मौजूद है ही; भोजपुरी नृत्य की विभिन्न शैलियों, लोकगीतों और लोककथाओं में भी लोकजीवन के पूरे रंग परिलक्षित हैं और साहित्य के सभी रसों का बोध वहां होता है। भोजपुरी की इक्यावन लोककथाओं का यह अनूठा संग्रह भोजपुरी जन-जीवन की इन समस्त छवियों को समझने हेतु एक उपयोगी है। पुस्तक

About Author :हिन्दी के सुपरिचित कथाकार मिथिलेश्वर (1950) द्वारा पुनर्प्स्तुत यह संकलन अपने पुनर्कथन में सेचक किस्सागोई और व्यापक प्रभाव से भरा हुआ है। एक सिद्धहस्त कथाकार के संस्पर्श से ये कहानियां जीवंत हो उठी हैं। इनकी कुछ महत्त्वपूर्ण मौलिक कृतियां हैं : प्रेम न बाड़ी ऊपजै, यह अंत नहीं (उपन्यास), तिरिया जनम, जमुनी (कथासंगह) आदि।

ISBN :9788123753721

 

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