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About book : Short story collection of Malti Devi .
"तुम्हारा कौन-सा ऐसा कॅरियर था बेटे, जिसका हमने कचरा कर दिया।" दोनों बहनों ने चींककर देखा, सब्जी का थैला लिए पापा दरवाजे पर खड़े थे। इस समय पापा का घर में होना अप्रत्याशित था, शायद वे वर्षांत में अपनी कॅज्यूअल्स खत्म कर रहे थे।"बेटे, तुम दस साल से संगीत सीख रही थीं, पर क्या हासिल हुआ। रेडियो का ऑडीशन तक तुम क्लीयर नहीं कर सकीं। गणेशोत्सव या दुर्गापूजा तक में गाने का तुम्हें कभी निमंत्रण नहीं मिला। न किसी ने तुम्हारा अल्बम निकालने की पेशकश की। सिर्फ कोरस में गाना या किसी के पीछे बैठकर तानपुरा बजाना ही तो कॅरियर नहीं होता।"
"पापा ! साधना में दस साल क्या हैसियत रखते हैं लोगों की पूरी-पूरी उम्र निकल जाती है, तब जाकर कोई मुकाम हासिल होता है।"
"और उस मुकाम के लिए हम कितनी प्रतीक्षा करते, बताओ ? उम्र तो तुम्हारी रुकी नहीं रहती ना और फिर कल को तुम्हीं कोसतीं कि हमने सही समय पर तुम्हारी शादी नहीं की ?"
"और छाया, करने वाले तो शादी के बाद भी कर ही लेते हैं वो तुम्हारी दोस्त है न सुचेता या सुमिता-आजकल उसका कितना नाम है ।"
माँ ने जैसे छाया की दुखती रग ही छू दी थी। वह एकदम तड़प गई, "उसके घर वाले कितने कोआपरेटिव्ह हैं, पता है। पति हर कार्यक्रम में उसके साथ जाता है और सास दो महीने के दूधपीते बच्चे को भी सँभाल लेती है।"
"जीजाजी भी तो तुम्हें लेकर हर कंसर्ट में जाते थे, हालाँकि उन्हें क्लासिकल में जरा भी रुचि नहीं है।"
"और उतनी देर तुम्हारी सास बबलू को रखती थीं कि नहीं ?" "पर बाद में सुनाती कितना थीं खैर, अब तो वह भी पुरानी बात हो गई है।
(इसी पुस्तक से )
About Author : Malti devi
Book Format : Paper back
