Himachali Lok Kathayen by Sudarshan Vashishtha

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  • Author Name : Sudarshan Vashishtha
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About Book : हिमाचली लोक-कथाएँ : लोक-कथाओं का उद्भव उतना ही पुराना है, जितनी मानव सभ्यता। ये केवल गाँव-कस्बे ही नहीं, देश-विदेश तक की यात्रा कर अपने परिवेश और स्वरूप को बदलती रहती हैं। इसी कारण एक लोक-कथा के कई रूपांतर मिलते हैं। विभिन्न मानवमूल्यों पर आधारित ये लोक-कथाएं स्थानीय संस्कृति के उद्गम और उसकी विशेषताओं को जानने-समझने में सहायता करती हैं।

हिमाचली लोक कथाएँ भी विशाल हिमालय क्षेत्र के समूचे समाज की भावना, आकांक्षा और मंगलकामनाओं से ओत-प्रोत हैं। यहाँ के हर गाँव में एक नहीं, कई-कई मंदिर हैं। हर देवता की एक कथा है। कुल्लू, सिरमौर और शिमला में विशिष्ट देव-परंपरा है। इस क्षेत्र में कथा सुनाने वालों को काथू' कहा जाता था और ये किसी गाँव आदि में रहकर महीनों कथाएँ सुनाते थे। यहाँ फागुन में फागली के समय देवता की "भारथा सुनाई जाती है, जिसमें उस देवता की उत्पत्ति और कृत्यों के बारे में बताया जाता है। शिव-पार्वती, देवी के स्थानों, नाग-सिद्धों के अतिरिक्त कुछ कथाएँ बाबा बालकनाथ, गुग्गा गाथा, सरवण गाथा आदि से भी जुड़ी हुई हैं।

हिमालय की कुछ लोक-कथाएं पौराणिक प्रसंगों पर आधारित हैं तो कुछ गाथाएँ ऐसी है जो आधी गाकर और आधी सुनाकर बखानी जाती हैं इनमें वीर गाथाएँ भी शामिल हैं, जिन्हें झेड़े या 'वार' कहा जाता है। इस संग्रह में ऐसी कथाओं को ही शामिल किया गया है जो विशुद्ध रूप से लोक-कथाओं की श्रेणी में आती हैं।

About Author : सुदर्शन वशिष्ठ (जन्म 24 सितंबर 1949, पालमपुर, हिमाचल प्रदेश) प्रसिद्ध कथाकार और हिमाचली समाज-संस्कृति के गहरे अध्येता । नौ कहानी-संग्रह, चार कविता-संकलन, दो लघु उपन्यास और एक व्यंग्य-संग्रह प्रकाशित। हिमाचल की संस्कृति और वहाँ के विभिन्न क्षेत्रों की यात्राओं पर एक दर्जन से ज्यादा पुस्तकें। आतंक उपन्यास जम्मू अकादमी तथा हिमाचल अकादमी से पुरस्कृत और नदी और रेत नाटक साहित्य कला परिषद्, दिल्ली से पुरस्कृत। हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी के पूर्व सचिव एवं उपाध्यक्ष तथा भाषा संस्कृति विभाग, हिमाचल प्रदेश के निदेशक रहे हैं। आप साहित्य अकादेमी की सामान्य परिषद् और हिन्दी परामर्श मंडल के सदस्य भी रहे हैं।

ISBN : 978-81-260-4308-8.

Book format: Paperback

Language: Hindi 

Book Genre: Literary fiction - Short stories 

Number of pages: 260

Publisher: Sahitya akademi 

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