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सर्वप्रथम रवीन्द्रनाथ टैगोर के माध्यम से ही विश्व ने भारत की आधुनिक साहित्य मनीषा का परिचय पाया 'गीतांजलि' ही नहीं, उनकी अन्य रचनाएँ भी बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों, सभी को चमत्कृत करती हैं। उनकी कथा-लेखन-यात्रा भी 1892 ई. से 1941 ई. तक उनके जीवन-पर्यन्त चलती रही। आधुनिक भारतीय कथा साहित्य को उनकी देन अनुपम है। इस पुस्तक में उनकी काबुलीवाला, दहेज, शुभा, पोस्टमास्टर, दीदी, पड़ोसन आदि सभी स्तर के पाठक-वर्ग द्वारा सराही गई कहानियों को संकलित किया गया है।
ISBN : 81-86265-96-1
