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About Book : किसी भी संस्कृति के उद्गम के विषय में जानने और समझने में वाचिक परंपरा से आधारभूत सहायता मिलती है, जिसे लोककथा कहा जाता है लोक कथाएँ मानव मूल्यों पर ही आधारित होती हैं और उनमें मानव जीवन के साथ ही उन सभी तत्वों का विमर्श भीजूद रहता है जो इस सृष्टि के आधारभूत तत्व हैं और जो मानव जीवन को उपस्थिति को निर्धारित करते हैं । बुंदेलखंड में मनुष्य का निवास प्रागैतिहासिक काल में भी था। उत्तर वैदिक साहित्य और पुराणों में भी इस क्षेत्र का विशेष उल्लेख है। महाकाव्य काल में भी यह क्षेत्र अन्य दूसरों संस्कृतियों के संपर्क में आता रहा। बौद्धकाल में बुंदेलखंड चेदि जनपद के अंतर्गत अवंति राज्य के अधीन रहा। चंदेल राजाओं ने बुंदेलखंड का सम्मान चरम पर पहुँचाया.। इस काल की ऊँचाइयों के साथ, संस्कृत के वैदिक एवं पौराणिक कथानकों एवं श्लोकों के साथ बुंदेली जन- भाषा के रूप में मौजूद रही। अत: यहाँ की लोककथाओं की विविधता प्रभावित करनेवाली है। बुंदेलखंड का मूल समाज आज भी अपनी मौलिक मान्यताओं और रीति-रिवाजों के साथ-साथ लोककथाओं के साथ जीवन यापन कर रहा है। परिवर्तन के दौर में यह धरोहर खोने लगी है। अत: इन जीवन अनुभवों को सहेज कर रखना आवश्यक है। इस पुस्तक बुंदेली लोकथाएँ में प्रस्तुत लोककथाओं के माध्यम से बुंदेलखंड अंचल में प्रचलित आस्थाओं, जीवन शैली, मान्यताओं एवं लोक विश्वासों से पाठक परिचित हो सकेंगे, ऐसी आशा है।
About Author : शरद सिंह : (जन्म 29 नवंबर 1963, मध्यप्रदेश), एम.ए. (इतिहास)। 'खजुराहो की मूर्तिकला का सौंदर्यात्मक अध्ययन विषय पर पी-एच.डी.। प्राचीन भारतीय इतिहास, स्त्री विमर्श, आदिवासी जीवन, पर्यावरण, साक्षरता, धर्म आदि विभिन्न विषयों पर तीस से ज्यादा पुस्तकें प्रकाशित। पिछले पन्ने की औरतें एवं पंचकौड़ी (उपन्यास) एवं पाँच कहानी-संग्रह प्रकाशित । कहानियों का विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद रेडियो-टेलीविजन के लिए भी लेखन। न्यायालयिक विज्ञान पर लेखन के लिए गृह मंत्रालय का राष्ट्रीय गोविंद वल्लभ पंत सम्मान तथा कई अन्य प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय सम्मान । डॉ. हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के यूजीसी केंद्र में निर्माण सहायक के पद से स्वैछिक सेवानिवृत्ति के बाद स्वतंत्र लेखन एवं विभिन्न संस्थाओं के साथ सक्रियता।
Product detail
- Author : Sharad Singh
- Language : Hindi
- ISBN : 9788126043040
- Publisher : Sahitya akadem
- paperback : 263 Pages
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