Why Borrow ? : Avoid repeated cost on books buying or renting .You can take more risks in reading because you don’t have to commit to buying everything you read.If you don’t like a book, just take it back. Borrow Now
About Author : रांगेय राघव (1923-1962) ने मात्र उनचालीस वर्ष की अल्पायु में अड़तीस उपन्यास, सात दर्जन से अधिक कहानियां, छह कविता संग्रह, तीन नाटक, उन्नीस आलोचना, इतिहास, संस्कृति और चिंतन संबंधी पुस्तकें लिखीं। इनके अलावा शेक्सपियर के पंद्रह, गॉल्सवर्दी के एक और सोफोक्लीज के दो नाटकों का अनुवाद किया। इनके मूल लेखन के केंद्रीय विषय सन् 1942-1951 की घटनाएं-विश्वयुद्ध की छाया, बंगाल का अकाल, भारत छाड़ो आंदोलन, भारत पाक विभाजन, हिंदू-मुस्लिम दंगे, भारतीय स्वाधीनता, साम्यवादी दलों पर पाबंदी, महात्मा गांधी की हत्या, नेहरू युग की शुरुआत...आदि हैं। इसी आंदोलित वातावरण में रांगेय राघव कहानी लेखन के मैदान में उतरे। जाहिर है कि इनकी कहानियां हमारे समक्ष इतिहास के उस कालखंड का तिलिस्मी दरवाजा खोलती हैं। उस काल की शायद ही कोई बड़ी घटना हो जिसकी अनुगूंज रांगेय राघव की कहानियों में न मिले। उक्त परिस्थितियों के फलस्वरूप देश में महंगाई, बेरोजगारी, आर्थिक शोषण, कालाबाजारी, अभाव दरिद्रता, दमन और भ्रष्टाचार का बोलबाला हुआ, जिनका सिलसिलेवार व्यौरा इनकी कहानियों में मिलता है। 'गदल और 'पंच परमेश्वर जैसी कालजयी कहानियां आज भी जन-जन की जीभ पर बसी हुई हैं, तो इसका मूल कारण कथाकार रांगेय राघव का मौलिक जनसरोकार और गहन जीवन दृष्टि ही है अपने समय और समाज के प्रति संपूर्ण रूप से जिम्मेदार कथाकार रांगेय राघव की ऐसी ही कहानियों का चुनिंदा संकलन रांगेय राघव : संकलित कहानियां है। संकलक वीरेश कुमार हिन्दी साहित्य में काम करने वाले उन थोड़े से लोगों में से हैं, जिनकी निष्ठा काम की गुणवत्ता में है। वे संकलन संपादन के कार्य की जिम्मेदारी को समझते हैं। करीब सात दर्जन कहानियों में से इक्कीस कहानियों की चयन दृष्टि और उसकी संपादन-कला इनके कौशल का प्रमाण है।
ISBN : 978-81-237-4561-9
