Aage Rasta band hai By Rajender Yadav

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MRP.40 Rs. 20
  • Availability : In Stock
  • Author Name : Rajender Yadav
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About Book : सारे दरबारियों को सख्त आदेश दे दिये गये। जो कुछ राजा या मंत्रिमंडल चाहेगा, वही बोलना होगा। स्वतंत्र-मत, दूसरा पक्ष, मतभेद, आत्मा की आवाज जैसा कोई भी बहाना नहीं सुना जायेगा। ये विरोधियों यानी सत्ता लोलुपों की शब्दावली है। यहां तो गलत हो या सही, हरेक को हां-में-हां मिलानी होगी। आखिर अनुशासन भी तो कोई चीज है। दरबार से बाहर, या अपने व्यक्तिगत जीवन में आप तुरंभ खां हों तो बने रहिए-यहां तो 'पायलागी महाराज' कहते हुए ही आना होगा। राष्ट्र, समाज, जनता, भविष्य, वर्तमान सबका आपके लिए एक ही अर्थ है, राजा और राजा की इच्छा ! राजा किसी भी शंका, आलोचना और जवाबदेही से ऊपर होगा....हां-तो आज की बहस का मुद्दा है, राजा के दैवी वस्त्रों की तारीफ.....चूंकि सारे दरबारी बहुमत में थे, फिर ऊपर से आदेश का यह 'कोड़ा' (हिप) लगा दिया गया था। सब एक स्वर से वाह-वाह करने लगे। सियारों जैसी इस हुआं-हुआ में बाकी सब आवाजें दब गयीं...लेकिन बच्चा हंस रहा था। शरमाकर बोला, “अरे राजा तो नंगा है, सारे लोग उसके किन वस्त्रों की तारीफ कर रहे हैं ? सुनते ही सारे सियार हंस पड़े....

आगे की कहानी बहुत छोटी है। बच्चे को यहीं भालों से छेद दिया गया, उसके मां-बाप को हाथी से कुचलवा दिया गया और जिस पाठशाला में वह पढ़ता था उसके प्राचार्य को बीच मैदान में आधा गाड़कर कुत्ते छुड़वा दिये गये और कोड़ों की मार से हंसने वाले दरबारियों की चमड़ी उधड़वा दी गयी।

जी नहीं, पुरानी कहानी नहीं, यह घटना है, और घटित हुई पटना रेडियो पर ....बाहर के चुनावी नारों को सुन-सुनकर सारी सावधानियों के बावजूद छ साल की बच्ची फिर बोल पड़ी, "गली-गली में शोर है, राजीव गांधी चोर है।" उसकी यह आवाज प्रसारित हो गई !   "इसी पुस्तक से"  See more 

About Author : राजेन्द्र यादव , जन्म :28 अगस्त, 1929 , शिक्षा : एम. ए. (आगरा) ,निवास : आगरा, मथुरा, झांसी, कलकत्ता होते हुए अब दिल्ली में। प्रथम रचना : प्रतिहिंसा ('चांद' के भूतपूर्व संपादक श्री रामरखसिंह सहगल के मासिक 'कर्मयोगी में) 1947 में।

प्रकाशित रचनाएँ  - उपन्यास: सारा आकाश, उखड़े हुए लोग, शह और मात, एक इंच मुस्कान ( मन्नू भंडारी के साथ), कुलटा, अनदेखे अनजाने पुल, मंत्रविद्ध। कहानी संग्रह देवताओं की मूर्तियों, खेल-खिलौने, जहाँ लक्ष्मी कैद है, छोटे-छोटे ताजमहल, किनारे से किनारे तक, टूटना, ढोल और अपने पार, वहाँ तक पहुँचने की दौड़, श्रेष्ठ कहानियाँ, प्रिय कहानियाँ, प्रतिनिधि कहानियाँ, प्रेम कहानियाँ, दस प्रतिनिधि कहानियाँ और चौखटे तोड़ते त्रिकोण। (अब तक की तमाम कहानियाँ पड़ाव-1, पड़ाव-2 और 'यहाँ तक शीर्षक तीन जिल्दों में संकलित)। कविता संग्रह : आवाज तेरी है। समीक्षा-निबंध कहानी : स्वरूप और संवेदना। उपन्यास : स्वरूप और संवेदना। कहानी : अनुभव और अभिव्यक्ति, औरों के बहाने, अठारह उपन्यास, कांटे की बात (छः खंड)।

संपादन : नये साहित्यकार पुस्तकमाला में मोहन राकेश, कमलेश्वर, राजेन्द्र यादव, फणीश्वरनाथ रेणु तथा मन्नू भंडारी की चुनी हुई कहानियाँ । एक दुनिया : समानांतर, कथा-यात्रा, कथा-दशक, आत्मतर्पण और काली सुखियाँ (अफ्रीकी कहानियाँ)।

Book format: Paperback

Language: Hindi 

Book Genre: Liteary fiction novel .

Number of pages: 160

Publisher: Vani Prakashan  

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