Havva ki betiyon ki dastaan Dardza By Jaishree roy

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  • Author Name : Jaishree roy
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About book : विश्व के मानचित्र को फैला कर देखें तो काले महादीप अफ्रीका का एक बहुत बड़ा धब्बा इसमें नजर आता है। इसी धब्बे के भीतर अनगिन छोटे-छोटे बिन्दुओं का एक पूरा संजाल बिछा है-केनिया, इथिओपिआ, सोमालिया...इन्हीं बिन्दुओं में कैद हैं माहरा जैसी करोड़ों औरतें जिनके जीवन का हर पल जाने कितनी सदियों से दुख और दर्द की काली स्याही से लिखा जा रहा है। सिर्फ इसलिए कि वे औरतें हैं! इन्हीं के दुख-दर्द और उच्छ्वासों की कहानी बटोर लायी हूँ आप सब के लिए । चाहती हूँ इस किताब को पढ़ते हुए आप सब एक पल के लिए ही सही, माहरा और उस जैसी बेशुमार औरतों की पीड़ा और त्रासदी को ज़रूर महसूस करें जिनमें जीने के लिए वे पीढ़ी-दर-पीढ़ी अभिशप्त हैं। माहरा और उसकी जैसी औरतें नस्ल, मज़हब, ज़ुबान और रंग से परे वस्तुतः एक स्त्री होती हैं जिसकी मूलभूत संवेदनाएँ हमारी-आपकी जैसी ही हैं। आँसुओं का खारापन, दर्द का स्वाद, काली त्वचा के नीचे बहने वाले लहू का रंग...सब कुछ दुनिया के हर कोने में बसने वाली औरतों के समान ही है। इस सुदूर देश की अनजान स्त्रियों की संवेदनाओं को अपनी भाषा में सहेज लायी हूँ इसी बहनापे की अनुभूति के साथ कि जब हमारी नियति साझे की है तो दुख-सुख भी आपस में ईमानदारी से बाँट लेना है। इन औरतों का औरत होना दुख में होना है, बद्दुआ में होना है, अजाब में होना है... 

अफ्रीका के जंगलों और धू-धू करते रेगिस्तानों की इस स्याह-शुष्क दुनिया के चप्पे-चप्पे में माहरा जैसी लाखों बदनसीब औरतों की दर्द भरी कहानी धूल, बवंडर और आँधी के साथ रात-दिन उसासें लेती रहती हैं। इन्हें सुनने के लिए कान से अधिक हृदय की ज़रूरत है। "माहरा', निरन्तर लड़ रही है, मगर अभी उसका संघर्ष ख़त्म नहीं हुआ है। उसे-उन्हें, हमारे साथ की आवश्यकता है। युगों से मौन माहरा अब जब बोलने के लिए मानसिक रूप से तैयार हुई है, बेहतर है आप माहरा की कहानी खुद उसी की जुबान से सुनें। आखिर यह उसका भोगा हुआ यथार्थ है, उसका जीवन!

About Author : Jaishree roy 

Book format: Paperback

Language: Hindi 

Book Genre: Literary fiction novel 

Number of pages: 198

Publisher: Vani Prakashan 

ISBN : 978-93-5229-448-0

Dimension : 7.99*10*1.85

Weight :0.280gm

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