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About Book : हेटा म्युलर छोटे और सरल वाक्यों में एक नीरव, स्लेटी चित्र की रचना करती है। जिसमें कोई भी खुशी देखने को नहीं मिलती और जिसमें मौत और घड़ियाँ हर तरफ मौजूद है। इस उजाड़ नजारे को उनके चौंकाने वाले और मायावी रूपको ने और विचित्र जादुई चित्रण ने और भी प्रबल कर दिया है। एक सेव के पेड़ में मुँह का खुल जाना और अपने ही सेबों को खाना या फिर एक पतंगे का दर्जी के गालों से होते हुए सिर के पीछे से सफेद और बिना मुड़े-तुड़े हुए निकल जाना किसी भी पाठक की कल्पना करने की क्षमता को चरम सीमा पर पहुँचने पर मजबूर कर देगा ।
About Author हेटा म्युलर जन्म 17 अगस्त, 1955 में रोमानिया के नित्सकीडॉर्फ नामक गाँव में हुआ। 1973 से 1976 तक इन्होंने जर्मन और रोमानियाई साहित्य, भाषा और संस्कृति का अध्ययन किया और एक कारखाने में बतौर अनुवादिका नियुक्त हो गयीं। लेकिन जब इन्होंने खुफिया विभाग 'सिक्योरिताते' को सहयोग देने से इनकार कर दिया तो इन्हें यह काम छोड़ना पड़ा। तब इन्होंने 1979 से 1983 तक जर्मन शिक्षिका के रूप में काम किया और 1984 से स्वतन्त्र लेखन आरम्भ कर दिया। मार्च 987 से ये जर्मनी की प्रवासी हैं। इन्हें अनेक साहित्य पुरस्कारों से सम्मानित होने के वाद वर्ष 2009 में साहित्य का नोवेल पुरस्कार प्रदान किया गया.
Book format: Paperback
Language: Hindi
Book Genre: Literary fiction novel .
Number of pages: 104
Publisher: Vani Prakashan
ISBN : 978-93-5072-693-8
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