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About book : दिल्ली का गैंगरैप जो दामिनी के साथ घटा वह निंदनीय, शर्मनाक और जुल्म की इन्तहा है, जिसमें उसकी जान चली गई। उसके साथ कब, क्या और केसे बदमाशों ने दुर्घटना को अंजाम दिया उसके आधार पर मैंने उपन्यास दामिनी जिंदा है को लिखकर आप सबको समर्पित किया है। ऐसा क्या हो गया स्वतन्त्रता छिन गई। स्वतन्त्र देश में स्वतन्त्र विचरने पर ग्रहण लग गया। सारा राजनीतिक और सामाजिक ढाँचा क्षतिग्रस्त हो गया। आधुनिक संसार में जीना दूभर हो गया। बूढ़े बुजुर्गों की अवहेलना होने लगी। माँ-बहिनों का सत्कार मिट गया। नग्नता, अश्लीलता तथा साम्राज्य पनपने लगा। लूट हत्याओं का सिलसिला बढ़ने लगा। असुरक्षा की भावना दिखने लगी। नरीह बालाओं का अपहरण और बलात्कार होने लगे। स्त्रियों की इतनी दुर्दशा तो कट्टरपंथी देशों और गुलामी को मात दे गई। रात के अन्धेरे में नहीं सूर्य के उजाले में छात्राओं से अभद्र व्यवहार होने लगे। हमारी सांस्कृतिक विरासत को क्या हो गया। जिसमें नारी को देवी और भगवती की संज्ञा दी जाती थी। यत्र पूज्यन्ति नारी तत्र रमते देवता। कुछ लोगों का कहना है कि पश्चिमी सभ्यता के आगमन से सारा सामाजिक ढाँचा चरमरा गया है। नशे और अश्लीलता के बादल उमड़ आए हैं। समलैंगिकता तथा खुले सैक्स ने आपदाओं को निमन्त्रण दिया है। दम मारो दम की बेशर्मी इसके लिए उत्तरदायी है। कुछ लोगों का यह भी विचार है प्रशासनिक विधायिका और न्यायपालिका इसके लिए उत्तरदायी है। कुछ लोग पुलिस की कार्य प्रणाली से आक्रोश में भरे हैं। कुल है मिलाकर कहा जाए तो भ्रष्टाचार की खिचड़ी सड़क से संसद तक पक रही है। पुलिस और राजनीति अन्य डान माफिया के हाथों में खेल रही है। राजनीति और अपराधीकरण में तालमेल है। ऐसे आम नागरिक तो आटे की चक्की में पिस रहा है। खासकर स्त्रियाँ रेप की त्रासदी भोग रही हैं।
हमारा समाज जो अपनी लाज, शर्म हया का सटीक प्रमाण था वह इतना अशिष्ट और असभ्य क्यूँ हो गया। आखिर वे कारण गौण रूप में इसके जिम्मेदार हैं। उन पर बहुत कम दृष्टिपात हुआ है
About Author : Gopal krishan sharma.
Book format : Hard cover
Language: Hindi.
Book Genre: Literary Fiction Novel.
Number of pages: 124
Publisher: Vaibahav Prakashan
Available : Available for Read & Return.
ISBN :9788192003320.
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