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About book : निर्मला के बाद गबन" प्रेमचंद का दूसरा यथार्थवादी उपन्यास है। कहना चाहिए कि यह उसके विकास की अगली कडी है। यह उपन्यास जीवन की असलियत की छानबीन अधिक गहराई से करता है, भ्रम को तोड़ता है। नए रास्ते तलाशने के लिए पाठक को नई प्रेरणा देता है। इस उपन्यास में प्रेमचंद ने पहली नारी समस्या को व्यापक भारतीय परिप्रेक्ष्य में रखकर देखा है और उसे तत्कालीन स्वाधीनता आंदोलन से जोड़कर देखा है। सामाजिक जीवन और कथा-साहित्य के लिए यह एक नई दिशा की ओर संकेत करता है।
About author : प्रेमचंद (1880-1936) का जन्म बनारस के निकट लमही गांव में हुआ था। स्कूल की शिक्षा पूरी करने के बाद अनेक प्रकार के संघर्षों से गुजरते हुए उन्होंने बी. ए. की पढ़ाई पूरी की। इक्कीस वर्ष की उम्र में उन्होंने लिखना प्रारंभ किया। लेखन की शुरुजात उर्दू में नवाब राय नाम से किया और 1910 में उनकी उर्दू में लिखी कहानियों का पहला संकलन 'सोजे वतन नाम से प्रकाशित हुआ। इस संकलन को ब्रिटिश सरकार ने जब्त करवा दिया। इसके बाद उनके जीवन में नया मोड़ आया। अपने लेखन का माध्यम उन्होंने हिंदी भाषा को बनाया और प्रेमचंद ' नाम से लिखना शुरू किया। आगे चलकर यही नाम भारतीय कथा साहित्य में अमर हुआ । प्रेमचंद ने 1920 तक सरकारी नौकरी की। इसी समय उपनिवेशवादी ब्रिटिश शासन के विरुद्ध पूरे देश में सत्याग्रह शुरू हुआ जिसका उनके मन पर गहरा असर हुआ और उन्होंने सरस्वती प्रेस की स्थापना की और 1930 में 'हस नामक ऐतिहासिक पत्रिका का संपादन प्रकाशन शुरू किया। प्रेमचंद ने लगभग तीन सौ कहानियां लिखी हैं। इनके अलावा अनेक उपन्यास र वैचारिक निबंध लिखे ।गोदान सेवासदन, प्रेमाश्रम, गवन, रंगभूमि, निर्मला आदि अनेक प्रसिद्ध उपन्यास है।
Book Format : Paper Back.
Language : Hindi
Book genre : Fiction Literary collection
Publisher : Prakashan sansthan
Number of pages :272
ISBN : 8186311955
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